श्री गणपति अष्टोत्रम् : Ganesh Ji Ke 108 Naam [ Original ]

Ganesh Ji Ke 108 Naamगणपति अष्टोत्तरशतनामावलि (Ganapathi Ashtothram) का सम्बन्ध श्री गणेश भगवान से है जिसमे गणेश के 108 नामों का अर्थ होता है| गणपति अष्टोत्रम्, गणेश भगवान के अलग – अलग गुणों और महत्व के बारे में बताता  है। गणेश भगवान हिन्दू धर्म के सबसे प्रसिद्ध और पूज्य देवता माने जाते हैं, और वे विज्ञान, कला, शिक्षा, और विजय के प्रतीक के रूप में जाने जाते हैं। गणपति अष्टोत्तरशतनामावलि का पाठ भक्ति और ध्यान के लिए महत्वपूर्ण है और यह हिन्दू धर्म के अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Ganesh Ashtothram in Hindi

जो व्यक्ति गणपति अष्टोत्तरशतनामावलि का पाठ ध्यान से करता है तो भगवान गणेश,उस भक्त के आप पास उत्पन सभी नकारात्मक उर्जा को दूर कर देते है और भक्त उनकी कृपा से जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस लेख में, हम गणपति अष्टोत्तरशतनामावलि (Ganapathi Ashtothram in Hindi) और इसके महत्व, पाठ करने का तरीका, और इसके प्रत्येक नाम का अर्थ विस्तार से जानेंगे।

अतः गणपति अष्टोत्रम् (Ganesh Ashtothram Shatnamavali), गणेश जी के 108 नामों को कहते है जिसके जाप करने से सभी कष्ट दूर होते है और भगवान गणेश हमेशा अपनी दया और आशीर्वाद बनाये रखते है|

 गणपति अष्टोत्रम् : Ganesh Ashtothram in Hindi

॥दोहा॥

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

Ganesh Ji Ke 108 Naam

ॐ गजाननाय नमः
ॐ गणाध्यक्षाय नमः
ॐ विघाराजाय नमः
ॐ विनायकाय नमः
ॐ द्त्वॆमातुराय नमः
ॐ द्विमुखाय नमः
ॐ प्रमुखाय नमः
ॐ सुमुखाय नमः
ॐ कृतिने नमः
ॐ सुप्रदीपाय नमः !! 10 !!

ॐ सुखनिधये नमः
ॐ सुराध्यक्षाय नमः
ॐ सुरारिघाय नमः
ॐ महागणपतये नमः
ॐ मान्याय नमः
ॐ महाकालाय नमः
ॐ महाबलाय नमः
ॐ हेरम्बाय नमः
ॐ लम्बजठराय नमः
ॐ ह्रस्वग्रीवाय नमः !! 20 !!

ॐ महोदराय नमः
ॐ मदोत्कटाय नमः
ॐ महावीराय नमः
ॐ मन्त्रिणे नमः
ॐ मङ्गल स्वराय नमः
ॐ प्रमधाय नमः
ॐ प्रथमाय नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ विघ्नकर्त्रे नमः
ॐ विघ्नहन्त्रे नमः !! 30 !!

ॐ विश्वनेत्रे नमः
ॐ विराट्पतये नमः
ॐ श्रीपतये नमः
ॐ वाक्पतये नमः
ॐ शृङ्गारिणे नमः
ॐ आश्रित वत्सलाय नमः
ॐ शिवप्रियाय नमः
ॐ शीघकारिणे नमः
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ बलाय नमः !! 40 !!

ॐ बलोत्थिताय नमः
ॐ भवात्मजाय नमः
ॐ पुराण पुरुषाय नमः
ॐ पूष्णे नमः
ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः
ॐ अग्रगण्याय नमः
ॐ अग्रपूज्याय नमः
ॐ अग्रगामिने नमः
ॐ मन्त्रकृते नमः
ॐ चामीकर प्रभाय नमः !! 50 !!

ॐ सर्वाय नमः
ॐ सर्वोपास्याय नमः
ॐ सर्व कर्त्रे नमः
ॐ सर्वनेत्रे नमः
ॐ सर्वसिध्धि प्रदाय नमः
ॐ सर्व सिद्धये नमः
ॐ पञ्चहस्ताय नमः
ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः
ॐ प्रभवे नमः
ॐ कुमार गुरवे नमः !! 60 !!

ॐ अक्षोभ्याय नमः
ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः
ॐ प्रमोदाय नमः
ॐ मोदकप्रियाय नमः
ॐ कान्तिमते नमः
ॐ धृतिमते नमः
ॐ कामिने नमः
ॐ कपित्थवनप्रियाय नमः
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः
ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः !! 70 !!

ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः
ॐ जिष्णवे नमः
ॐ विष्णुप्रियाय नमः
ॐ भक्त जीविताय नमः
ॐ जित मन्मथाय नमः
ॐ ऐश्वर्य कारणाय नमः
ॐ ज्यायसे नमः
ॐ यक्षकिन्नॆर सेविताय नमः
ॐ गङ्गा सुताय नमः
ॐ गणाधीशाय नमः !! 80 !!

ॐ गम्भीर निनदाय नमः
ॐ वटवे नमः
ॐ अभीष्ट वरदायिने नमः
ॐ ज्योतिषे नमः
ॐ भक्त निधये नमः
ॐ भावगम्याय नमः
ॐ मङ्गल प्रदाय नमः
ॐ अव्वक्ताय नमः
ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः
ॐ सत्यधर्मिणे नमः !! 90 !!

ॐ सखये नमः
ॐ सरसाम्बु निधये नमः
ॐ महेशाय नमः
ॐ दिव्याङ्गाय नमः
ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः
ॐ समस्तदेवता मूर्तये नमः
ॐ सहिष्णवे नमः
ॐ सततोत्थिताय नमः
ॐ विघ्त कारिणे नमः
ॐ विश्वग्दृशे नमः !! 100 !!

ॐ विश्वरक्षाकृते नमः
ॐ कल्याण गुरवे नमः
ॐ उन्मत्त वेषाय नमः
ॐ अपराजिते नमः
ॐ समस्त जगदाधाराय नमः
ॐ सर्त्वॆश्वर्यप्रदाय नमः
ॐ आक्रान्त चिदचित्प्रभवे नमः
ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः !! 108 !!

!! इति श्री गणपति अष्टोत्रम् !!

[Original] Ganesh Chalisa – गणेश चालीसा इन हिंदी

॥दोहा॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥

गणपति अष्टोत्रम् का महत्व

गणपति अष्टोत्रम् का महत्व गणेश भगवान की पूजा में होता है। इस पूजा के दौरान, भक्त गणेश भगवान के 108 नामों का जाप करते हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। गणपति अष्टोत्तरशतनामावलि के पाठ से मान्यता है कि भक्त गणेश भगवान के प्रत्येक नाम को एक साथ पुकारने से उनकी प्रसन्नता होती है और सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

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यह पूजा विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के दिन की जाती है, जो गणपति भगवान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन, भक्त गणपति अष्टोत्तरशतनामावलि का पाठ करके भगवान के आगमन को स्वागत करते हैं और उन्हें पूजन करते हैं। इस पूजा के माध्यम से वे गणपति भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं।

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