विष्णु भगवान व्रत कथा आरती सहित – पूरी जानकारी [Lord Vishnu]

विष्णु भगवान व्रत कथा आरती सहित - पूरी जानकारी [Lord Vishnu]भगवान विष्णु के कथा (vishnu katha vrat) का हिंदू धर्म में काफी अधिक महत्व है, क्योंकि भगवान विष्णु को इस पूरे सृष्टि का पालनहार माना जाता है जिसके कारण भगवान विष्णु की कथा व्रत करने तथा विष्णु चालीसा (vishnu chalisa) के पाठ का उच्चारण करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उनके मन को शांति और अध्यात्म की प्राप्ति होती है.

भगवान विष्णु क्षीर सागर में  नाग की सैया पर  माता लक्ष्मी के साथ हमेशा विराजमान रहते हैं. जो 4 मास के लिए  ध्यान मग्न हो जाते हैं इस समय यदि कोई  भी  व्यक्ति विष्णु जी आरती के अलावे  भगवान विष्णु के कथा व्रत का पालन करता है तो उसे अंतिम रूप से बैकुंठ की प्राप्ति होती है. इस पोस्ट में हम आपको भगवान विष्णु की कथा व्रत, नियम, विष्णु  जी की आरती (Lyrics),कहानी आदि से जुड़ी जानकारी बताने वाले हैं इसलिए आप इस पोस्ट के साथ अंत तक बनी रहे.

विष्णु भगवान व्रत कथा

भारतवर्ष में एक पराक्रमी राजा रहता था, जो दान पुण्य में काफी अधिक विश्वास रखता था. इसलिए वह प्रतिदिन गरीबों और ब्राह्मणों को दान देकर उनकी सहायता करता है परंतु यह बात रानी को अच्छी नहीं लगती थी क्योंकि रानी दान देने में विश्वास नहीं रखते थी.इनको ईश्वर में विश्वास नहीं था जिसके कारण यह राजा को दान देने से मना किया करते थी. विष्णु जी के 1008 नाम 

एक दिन की बात है राजा शिकार खेलने के लिए बने गए हुए थे, और रानी महल में अकेली थी उसी  समय भगवान विष्णु जी  साधु के भेष में भिक्षा मांगते हुए राजा के महल की ओर पहुंच गए और भिक्षा मांगने लगे जिसके बदले में रानी ने भिक्षा देने से इनकार कर दिया और उन्होंने कहा कि साधु महात्माओं के दान पुण्य से मैं परेशान हो गई हूं. जिससे मेरी इच्छा है कि हमारा धन नष्ट हो जाए क्योंकि ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी.

कल्कि अवतार

इतना बात सुनकर साधु ने कहा- कि देवी तुम बड़ी विचित्र स्त्री हो. क्योंकि धन और संतान तो सभी लोग पाना चाहते हैं. इसमें पुत्र और लक्ष्मी तो पापी के घर भी होनी चाहिए, परंतु यदि तुम्हारे पास धन ज्यादा है तो भूखे लोगों को भोजन दो, प्यासे को पानी दो, जो मुसाफिर लोग हैं उनके लिए धर्मशाला बनाओ इससे भी धन खर्च ना हो तो कुंवारी कन्याओं का विवाह करवाओ क्योंकि ऐसा काम करने से तुम्हारे कृति की गाथा  पृथ्वी सहित पूरे ब्रह्मांड में फैलेगी. इन्हें भी जाने – विष्णु चालीसा पाठ 

इतना बात सुनकर रानी ने कहा कि मुझे वैसा धन नहीं चाहिए  जिसको मैं जगह-जगह घूमकर  बांटती रहूं.इस बात से  नाराज होकर ब्राह्मण ने कहा कि यदि तुम्हारी यही इच्छा है कि तुम्हारा धन नष्ट हो जाए तो मैं तुम्हें कुछ उपाय बताता हूं इसके करने से तुम्हारे सारे धन नष्ट हो जाएंगे.

वराह अवतार फोटो

साधु ने कहा कि बृहस्पतिवार को अपने घर को लिप कर और अपने बाल पीली मिट्टी से धोकर स्नान करना और भट्‌टी चढ़ाकर कपड़े धोना, क्योंकि ऐसा करने से आपका सारा धन नष्ट हो जाएगा. यह सभी उपाय बताने के बाद साधु महात्मा वहां से आलोप हो गए. Vishnu chalisa PDF Download – Click Hare

रानी मैं जब 3 बृहस्पतिवार तक साधु की बातों का पालन किया तो उसके धन नष्ट हो गए, और ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी राजा के घर खाने के लिए उनके दाने भी नहीं थे.

राजा रोजगार के चक्कर में दूसरी देश जाना चाहता था, क्योंकि अपनी राज्य में कोई भी छोटा कार्य नहीं कर सकता था, क्योंकि राजा होकर यदि कोई छोटा काम करें, तो उसे लोग पहचान लेंगे और राजा की मानहानि हो सकती है. रानी से इतनी बात कहकर राजा प्रदेश चला गया और वहां जाने के बाद वह जंगल से लकड़ी काटता और उसे लाकर शहर में बेचता था, जिससे कि उसका जीवन व्यतीत होने लगा. परंतु इधर रानी, राजा के ना होने के कारण काफी परेशान और दुखी रहने लगी.

shri vishnu chalisa

कहा जाता है कि भूख की मार से अच्छे अच्छों की घमंड टूट जाती है वही हाल रानी के साथ हुआ जब कुछ दिनों के बाद रानी और दासी को 7 दिन तक बिना भोजन का रहना पड़ा, तो रानी ने अंत में आकर अपनी दासी से कहा:हे दासी !  मेरी बहन पास  के नगर में रहती है जिसके पास काफी अधिक धन है. तो उसके पास जाओ और खाने के लिए भोजन लेकर आओ ताकि हम अपनी भूख को मिटा सकें. इतनी बात सुनकर दासी रानी की बहन के पास गई.

जब दासी रानी के कहने पर, रानी के बहन के घर गए तो देखा कि रानी की बहन बृहस्पति भगवान का व्रत अर्थात विष्णु भगवान व्रत का कथा सुन रही थी क्योंकि उस दिन गुरुवार का दिन था. दासी रानी की बहन से अपनी रानी का संदेश सुनाया, परंतु रानी की बड़ी बहन ने कोई  जवाब नहीं दिया जिसके कारण दासी को काफी अधिक गुस्सा आया और वह उसी गुस्से के साथ अपनी रानी से जाकर सभी बातें बताई, जिसको सुनकर रानी को अपने भाग्य पर रोना आ गया.

परशुराम जी का फोटो

रानी की बड़ी बहन कथा में इतनी मग्न थी की दासी कि किसी भी बात का जवाब नहीं दे पाए, किस बात को लेकर बड़ी बहन को काफी दुख हुआ. जो विष्णु भगवान व्रत कथा पूरा करने के बाद अपनी बहन के घर आए और बोली: बोलो बहन अपनी दासी को तुम हमारे पास क्यों भेजी थी, मैं भगवान विष्णु की व्रत कथा कर रही थी, जिसके कारण मैं तुम्हारी दादी की किसी भी बात का जवाब नहीं दे पाई,क्योंकि कथा का नियम है कि भगवान विष्णु की व्रत कथा जब शुरू हो जाए, तब न तो उठना होता है और ना ही बोलना इसी कारण मैं तुम्हारी दासी की किसी भी बात का जवाब नहीं दे पाई. बोलो क्या बात है-

बड़ी बहन की बात सुनकर रानी बोली –  तुमसे क्या छिपाऊं, हमारे घर में खाने तक का अनार नहीं था इतना बात कहते हैं रानी की आंखें भर गई  और उसने दादी और अपनी भूखे रहने की 7 दिनों की कहानी अपनी बहन से बताई. इतना बात सुनकर बड़ी बहन ने कहा- 

 देखो बहिन! भगवान विष्णु जी सबकी मनोकामना पूर्ण करते हैं, इसलिए देखो कहीं तुम्हारे घर में अनाज रखा हो,

इस बात को सुनने के बाद रानी को पहले तो विश्वास नहीं हुआ परंतु बड़ी बहन के कहने पर उसने अपने दासी को घर के अंदर भेजा तो अनाज से भरा एक घड़ा मिला जिसको देखकर दासी  आश्चर्यचकित हो गई.इसके बाद दासी ही रानी से आकर कहा-

नरसिंह अवतार फोटो

हे रानी!  हमें वैसे भी खाने को नहीं मिलते जिसके कारण हम पूरे दिन व्रत ही रहते हैं क्यों ना हम बड़ी बहन से पूछ ले कि भगवान विष्णु के व्रत कथा की विधि क्या है जिसको जानकर हम भी भगवान विष्णु की व्रत कथा कर सकें.  इस बात को सुनकर रानी ने अपनी बड़ी बहन से विष्णु भगवान के व्रत कथा (बृहस्पतिवार व्रत कथा) के बारे में पूछा.

रानी की पूछने पर बड़ी बहन ने भगवान विष्णु के कथा व्रत के बारे में बताया कि बृहस्पतिवार के दिन  पीला वस्त्र धारण करके,चने की दाल और मुनक्का से श्री भगवान विष्णु का केले की जड़ में पूजन करें तथा दीप जलाएं और साथ ही बृहस्पतिवार व्रत कथा अर्थात भगवान विष्णु के व्रत कथा का अनुसरण करें.

जब 7 दिनों के बाद गुरुवार का दिन आया तो रानी और दासी भगवान बृहस्पति भगवान का व्रत रखा जिसमें पूजन के लिए चना और गुड़  का प्रबंध किया और पीले रंग का वस्त्र धारण करके उसके बाद उन दोनों ने केले की जड़ तथा विष्णु भगवान का पूजन किया और साथ में दीप जलाए. परंतु चिंता की बात यह थी कि पीले रंग का भोजन कहां से लाया था इसको लेकर काफी दुखी थी परंतु पूजन से भगवान विष्णु  प्रसन्न होकर एक साधारण व्यक्ति का रूप धारण करके दो थाली में पीले रंग का  भोजन लाकर दासी को दे दिए. भोजन पाकर रानी और दासी काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने साथ मिलकर भोजन को ग्रहण किया.

वामन अवतार फोटो

विष्णु भगवान व्रत कथा करने से उनके घर का धन-संपत्ति दोबारा भर गया परंतु रानी फिर पहले की तरह आलस्य करने लगी. जिसको देखकर दासी ने कहा- की रानी!  तुम पहले भी इसी प्रकार का अलग से करती थी जिसके कारण तुम्हारे धन नष्ट हो गए और अब जब भगवान बृहस्पति ने हमें दुबारा दे दिए हैं फिर भी तुम आलस्य दिखा रही है. जो कि अच्छी बात नहीं है.

दासी की रानी को समझाया कि बड़ी मुसीबतों के बाद हमने यह धन पाया है, इसलिए हमें दान-पुण्य करना चाहिए, भूखे मनुष्यों को भोजन कराना चाहिए, और धन को शुभ कार्यों में खर्च करना चाहिए, जिससे तुम्हारे कुल का यश बढ़ेगा, स्वर्ग की प्राप्ति होगी और पित्र प्रसन्न होंगे. दासी की बात मानकर रानी अपना धन शुभ कार्यों में खर्च करने लगी, जिससे पूरे नगर में उसका यश फैलने लगा.

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार,ऐसी मान्यता है कि प्रत्येक बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु जी की व्रत कथा का पाठ करने  के बाद विष्णु जी की आरती करनी चाहिए और अंत में प्रसाद का वितरण करके स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करनी चाहिए. जिससे आपको अधिक लाभ की प्राप्ति होती है.

Note – यदि यह पोस्ट आप सभी को अच्छा लगा होतो कमेंट में हे मेरे प्रभु जरुर लिखे और यदि आप बिष्णु जी के सच्चे भक्त है तो इस पोस्ट को जरुर शेयर करे. धन्यवाद

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